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इतिहास

भारत निर्वाचन आयोग का निर्वाचक प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता बढ़ाने के लिए निरंतर एवं सुव्‍यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता प्राप्‍त करने का निर्णय स्वीप के रूप में अब तक पहचाने जाने वाले नीति पहल कार्यक्रमों और क्रियाकलापों की श्रृंखला में प्रदर्शित किया गया, जिसे पिछले छह वर्षों में तीन स्वीप चरणों में शामिल किया गया है।

स्वीप I (2009-2013)

स्वीप का विचार नागरिकों के मतदाताओं के रूप में रजिस्ट्रीकरण में कमी तथा एक निर्वाचन से दूसरे निर्वाचन में टर्नआउट में बड़े अंतर के कारण पैदा हुआ। भारत में (टर्नआउट) पिछले अनेक वर्षों से 55-60 प्रतिशत पर आकर ठहर गया है, इस प्रकार करोड़ों पात्र नागरिक की इच्छा को छोड़ दिया जाता है। इस निर्धारण के बाद यह बौद्धिक समझ पैदा हुई कि कम सहभागिता लोकतंत्र की गुणवत्‍ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और इस समस्‍या का निराकरण करने के लिए प्रबंधन संबंधी पहलों की आवश्‍यकता उत्‍पन्‍न हुई। राष्ट्रीय निर्वाचन, 2009 और उसके तुरंत बाद कुछ राज्यों में हुए निर्वाचन के बाद भारत निर्वाचन आयोग के बैनर तले एक छोटे से प्रयोग की शुरूआत हुई जिसे बाद में वर्ष 2010 में संशोधित किया गया और इसे इसका वर्तमान नाम दिया गया। स्वीप का चरण-। सामान्यत: वर्ष 2009 के अंत से लेकर मार्च 2013 तक चला। इस अवधि में विभिन्न भौगोलिक स्थि‍तियों, शहरीकरण के स्तरों, साक्षरता, सुरक्षा और लॉजि‍स्‍टि‍क मुद्दों के चलते 17 राज्य विधान सभाओं के साधारण निर्वाचन हुए और निर्वाचक नामावलियों का तीन बार पुनरीक्षण हुआ।

स्वीप II (अप्रैल 2013-अब तक)

स्वीप के चरण-। की पहल को आगे ले जाते हुए और सुदृढ़ करते हुए विभिन्न खामियों को दूर करने के लिए लक्षित दृष्टिकोण हेतु सुनियोजित कार्यनीति को शामिल किया गया। इसके लिए एक सुसंगठित ढांचा बनाया गया था जिसमें मतदान केन्द्र वार स्थिति का विश्‍लेषण, पहल की योजना तैयार किया जाना तथा उन्‍हें क्रियान्वित करना, और उसके बाद सम्‍पूर्ण अवधि के दौरान नियमित अन्तराल पर पुनरीक्षा एवं मूल्यांकन किए जाने जैसे उपाय शामिल थे। इसमें नव शिक्षित एवं अशिक्षित समूहों के लिए विषयवस्‍तु तैयार किया जाना सम्मिलित था। स्वीप में आपूर्ति, विशेष रूप से मतदान केन्द्रों तथा मतदान दिवस पर सुविधाएं मुहैया करवाए जाने पर विशेष बल दिया गया था। स्‍वीप-।। का मुख्‍य केन्द्र बिन्दु होने के कारण वर्ष 2014 के लोक सभा निर्वाचन इतिहास तथा स्‍वीप शिक्षण में एक युगान्तरकारी घटना थी। लोक सभा निर्वाचनों के अलावा, इसके अधीन राज्‍य विधानसभाओं के दस साधारण निर्वाचनों को भी कवर किया गया।

स्वीप III (चलाया जा रहा है)

लोक सभा 2014 के ऐतिहासिक साधारण निर्वाचनों से सीख लेते हुए, एक और अधिक ठोस एवं गहन योजना, स्वीप के अगले चरण के लिए तैयार की जा रही है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्रतियोगिताओं एवं मतदाता उत्‍सवों के माध्यम से नागरिकों के साथ अधिकाधिक संपर्क; आधार और राष्‍ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल के साथ ई पी आई सी को जोड़ने की नई पहल के बारे में जागरूकता; क्रियाकलापों की एक विनियमित वार्षिक योजना इस चरण के भाग हैं। महिलाओं, युवाओं, शहरी मतदाताओं तथा उपेक्षित वर्गों के लक्षित समूहों के अतिरिक्‍त, सेवा मतदाताओं, अनिवासी भारतीयों, नि:शक्‍त व्‍यक्तियों, भावी मतदाताओं/छात्रों जैसे समूहों को सम्मिलित किए जाने के कार्य पर प्रमुख रूप से ध्‍यान दिया गया है। सहभागियों (पार्टनरों), सूक्ष्म सर्वेक्षणों के साथ अधिकाधिक तालमेल, निर्वाचक शिक्षा को शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ जोड़ने का कार्य स्वीप -।।। योजनाओं के अन्य प्रमुख भाग हैं।

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