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ढांचा

राष्ट्रीय स्तर

भारत निर्वाचन आयोग का स्‍वीप प्रभाग मतदान करने वाले लोगों, सभ्‍य समाज के समूह तथा मीडिया के साथ राष्‍ट्रीय परिप्रेक्ष्‍य में निरंतर संवाद करने के अतिरिक्‍त नीतियां प्रतिपादित करता है, ढांचा, योजनागत पहल निर्धारित करता है और कार्यान्‍वयन की अनुवीक्षा करता है। लोगों के व्‍यवहार में परिवर्तन लाने से जुड़ी जटिलताओं को महसूस करते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने स्‍वीप की संपूर्ण प्रक्रिया में सामाजिक अभिविन्‍यास और सहयोगी दृष्टिकोण पर बल दिया।

राज्य स्तर:

प्रत्येक राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में एक अधिकारी को राज्‍य में स्‍वीप कार्यक्रम का प्रभार सौंपा जाता है। शैक्षिक संस्‍थाओं, युवा संगठनों, महिला संगठनों तथा सभ्‍य समाज के संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करके गठित किए गए कोर समूह निर्वाचक सहभागिता के लिए स्‍वैच्छिक कार्रवाई को सुकर करते हैं। इसके अतिरिक्‍त, निर्वाचनों के दौरान स्वीप कार्य का अनुवीक्षण करने के लिए जागरूकता प्रेक्षक नियुक्‍त किए जाते हैं।

जिला स्तर:

जिला स्तर पर जिला कलेक्‍टर, जो जिले का प्रशासनिक प्रमुख होता है, पारम्‍परिक रूप से निर्वाचन प्रबंधन में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है। जिला कलेक्‍टर सामान्‍यत: जिला निर्वाचन अधिकारी होता है और जिला स्‍तर पर स्‍वीप कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन का नेतृत्‍व करता है।जिला स्‍तर पर गठित एक जिला स्‍वीप समिति का प्रमुख सामान्‍यत: जिला परिषद का मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी अथवा मुख्‍य विकास अधिकारी अथवा स्‍वयं जिला निर्वाचन अधिकारी, जो मुख्‍यत: अपर जिला मजिस्‍ट्रेट होता है।वह जिले में इस कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन का पर्यवेक्षण करता है।

बूथ लेवल

वर्ष 2006 से भारत निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों की नियुक्ति शुरू की है जिन्‍हें अधिकतर बी एल ओ के नाम से जाना जाता है जो सामान्‍यत: एक या दो मतदान केन्‍द्रों को देखते हैं तथा ये निर्वाचक नामावली को सुव्यवस्थित करने के लिए उत्‍तरदायी होते हैं। समग्र रूप से विधान सभा/संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली का अभिरक्षक निर्वाचक रजिस्‍ट्रीकरण अधिकारी होता है।


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